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नित्यं यज्ञक्रिया धर्म: पितृदेवार्चने रति:।
सर्वातिथ्यं च कर्तव्यमन्नेनोञ्छार्जितेन वै॥ ११०॥
अनुवाद
यज्ञ का अनुष्ठान और धर्म प्रतिदिन पालन करना चाहिए। देवपूजा और श्राद्ध में प्रीति रखनी चाहिए। ऋषियों का परम कर्तव्य है कि वे अष्टवृत्ति से अर्जित अन्न से सबका सत्कार करें।
The ritual and religion of Yagya should be followed daily. One should have love for deity worship and Shraddha. It is the supreme duty of the sages to provide hospitality to everyone with the food earned through unchchavrittis.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥