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mahabharat 13.146.107: देवि! चक्र के समान गति करने वाले और स्वर्ग में निवास करने वाले उपर्युक्त ब्राह्मणों ने सदैव इसी ऋषिधर्म का पालन किया है। इसके अतिरिक्त ऋषियों के अन्य धर्म भी मुझसे सुनो॥107॥   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.107 
एष चक्रचरैर्देवि देवलोकचरैर्द्विजै:।
ऋषिधर्म: सदा चीर्णो योऽन्यस्तमपि मे शृणु॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
देवि! चक्र के समान गति करने वाले और स्वर्ग में निवास करने वाले उपर्युक्त ब्राह्मणों ने सदैव इसी ऋषिधर्म का पालन किया है। इसके अतिरिक्त ऋषियों के अन्य धर्म भी मुझसे सुनो॥107॥
 
Devi! The aforementioned Brahmins who move like a wheel and reside in the heaven have always practised this Rishidharma. Apart from this, listen to the other dharma of the sages from me.॥ 107॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)