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mahabharat 13.146.102: वे देवताओं के समान रूप धारण करके उनके कार्य सिद्ध करते हैं। वे तपस्या द्वारा समस्त पापों को भस्म कर देते हैं और अपने तेज से सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करते हैं॥102॥   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.102 
ते सुरै: समतां यान्ति सुरकार्यार्थसिद्धये।
द्योतयन्ति दिश: सर्वास्तपसा दग्धकिल्बिषा:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
वे देवताओं के समान रूप धारण करके उनके कार्य सिद्ध करते हैं। वे तपस्या द्वारा समस्त पापों को भस्म कर देते हैं और अपने तेज से सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करते हैं॥102॥
 
He assumes a form similar to that of the gods to accomplish their tasks. He burns all sins through austerity and illuminates all directions with his brilliance.॥ 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)