श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.146.1 
श्रीभगवानुवाच
तिलोत्तमा नाम पुरा ब्रह्मणा योषिदुत्तमा।
तिलं तिलं समुद्‍धृत्य रत्नानां निर्मिता शुभा॥ १॥
 
 
अनुवाद
भगवान शिव बोले- प्रिये! प्राचीन काल में ब्रह्माजी ने एक श्रेष्ठ स्त्री की रचना की थी। उन्होंने समस्त रत्नों के सार को ग्रहण करके उस शुभ सुन्दरी के शरीर के अंगों की रचना की थी; इसीलिए वह तिलोत्तमा नाम से प्रसिद्ध हुई॥1॥
 
Lord Shiva said-Dear! In ancient times, Lord Brahma had created the best woman. He had created the body parts of that auspicious beauty by quoting every ounce of essence of all the gems; That's why she became famous by the name Tilottama. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)