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श्लोक  13.145.d5 
प्रकाशं यदि वा गुह्यं प्रियार्थं प्रब्रवीम्यहम्॥
शृणु तत् सर्वमखिलमस्यां संसदि भामिनी।
 
 
अनुवाद
भामिनी! जो भी बात हो, चाहे वह प्रकट हो या गुप्त, मैं तुम्हें प्रसन्न करने के लिए सब कुछ बता दूँगा। तुम इस सभा में मुझसे सब कुछ सुनो।
 
Bhamini! Whatever the matter is, open or secret, I will tell you everything to please you. You listen to everything from me in this gathering.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)