Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.145.7-9: इनके अतिरिक्त अनेक किन्नर, यक्ष, गन्धर्व, राक्षस और भूत-प्रेतों ने भी महादेवजी को घेर लिया था। भगवान शंकर की वह सभा दिव्य पुष्पों से आच्छादित थी, दिव्य तेज से परिपूर्ण थी, दिव्य चंदन से लिपी हुई थी और दिव्य धूप की गंध से सुगन्धित थी। दिव्य वाद्यों की ध्वनि वहाँ गूँजती रहती थी। ढोल और पणवों की ध्वनि व्याप्त थी। शंख और तुरही की ध्वनि सर्वत्र फैल रही थी। चारों ओर नाचते हुए भूत-प्रेत और मोर उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। | mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इनके अतिरिक्त अनेक किन्नर, यक्ष, गन्धर्व, राक्षस और भूत-प्रेतों ने भी महादेवजी को घेर लिया था। भगवान शंकर की वह सभा दिव्य पुष्पों से आच्छादित थी, दिव्य तेज से परिपूर्ण थी, दिव्य चंदन से लिपी हुई थी और दिव्य धूप की गंध से सुगन्धित थी। दिव्य वाद्यों की ध्वनि वहाँ गूँजती रहती थी। ढोल और पणवों की ध्वनि व्याप्त थी। शंख और तुरही की ध्वनि सर्वत्र फैल रही थी। चारों ओर नाचते हुए भूत-प्रेत और मोर उसकी शोभा बढ़ा रहे थे।
Apart from these, many Kinnars, Yakshas, Gandharvas, demons and ghosts had also surrounded Mahadevji. That assembly of Lord Shankar was covered with divine flowers, was filled with divine radiance, was smeared with divine sandalwood and was fragrant with the smell of divine incense. The sound of divine musical instruments kept resonating there. The sound of drums and panavas was prevalent. The sounds of conches and trumpets were spreading everywhere. The dancing ghosts and peacocks all around enhanced its beauty. 7-9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥