Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.145.44: हे गिरिराजकुमारी! जब संसार में सूर्य अदृश्य हो गया और सर्वत्र अंधकार छा गया, तब मैंने लोगों की रक्षा के लिए अपना तीसरा तेजोमय नेत्र उत्पन्न किया।   |   mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.145.44 
नष्टादित्ये तथा लोके तमोभूते नगात्मजे।
तृतीयं लोचनं दीप्तं सृष्टं मे रक्षता प्रजा:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे गिरिराजकुमारी! जब संसार में सूर्य अदृश्य हो गया और सर्वत्र अंधकार छा गया, तब मैंने लोगों की रक्षा के लिए अपना तीसरा तेजोमय नेत्र उत्पन्न किया।
 
O princess of Giri! When the sun became invisible in the world and darkness prevailed everywhere, then I created my third radiant eye to protect the people. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)