Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.145.41-42: आपके माथे पर तीसरी आँख क्यों प्रकट हुई? हे देव, आपने पक्षियों और वनों सहित पर्वत को क्यों जला दिया? आपने उसे उसकी मूल अवस्था में क्यों लौटा दिया? क्या कारण है कि आपने मेरे पिता को पहले की तरह वृक्षों से ढक दिया? | mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किमर्थं ते ललाटे वै तृतीयं नेत्रमुत्थितम्।
किमर्थं च गिरिर्दग्ध: सपक्षिगणकानन:॥ ४१॥
किमर्थं च पुनर्देव प्रकृतिस्थस्त्वया कृत:।
तथैव द्रुमसंच्छन्न: कृतोऽयं ते पिता मम॥ ४२॥
अनुवाद
आपके माथे पर तीसरी आँख क्यों प्रकट हुई? हे देव, आपने पक्षियों और वनों सहित पर्वत को क्यों जला दिया? आपने उसे उसकी मूल अवस्था में क्यों लौटा दिया? क्या कारण है कि आपने मेरे पिता को पहले की तरह वृक्षों से ढक दिया?
Why did the third eye appear on your forehead? Why did you burn the mountain along with the birds and forests, O God! Why did you bring it back to its original state? What is the reason that you covered my father with trees as before?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥