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mahabharat 13.145.36: उस पर्वत को जला हुआ देखकर गिरिराज की राजकुमारी देवी उमा हाथ जोड़कर भगवान शंकर के पास गईं।   |   mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.145.36 
तं दृष्ट्वा मथितं शैलं शैलराजसुता तत:।
भगवन्तं प्रपन्ना वै साञ्जलिप्रग्रहा स्थिता॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उस पर्वत को जला हुआ देखकर गिरिराज की राजकुमारी देवी उमा हाथ जोड़कर भगवान शंकर के पास गईं।
 
Seeing that mountain burnt, Goddess Uma, the princess of Giriraja, went to Lord Shankar with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)