Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.145.30: उसके माथे पर आदित्य के समान तेजस्वी एक तीसरा नेत्र प्रकट हुआ। वह नेत्र प्रलय की अग्नि के समान प्रज्वलित था। उस नेत्र से निकली ज्वाला ने उस पर्वत को जलाकर मथ डाला। | mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके माथे पर आदित्य के समान तेजस्वी एक तीसरा नेत्र प्रकट हुआ। वह नेत्र प्रलय की अग्नि के समान प्रज्वलित था। उस नेत्र से निकली ज्वाला ने उस पर्वत को जलाकर मथ डाला।
A third eye as bright as Aditya appeared on his forehead. That eye was glowing like the fire of destruction. The flame that emerged from that eye burnt and churned that mountain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥