Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.145.28: सब लोग निराश हो गए, सब पर भय छा गया। जब भूतनाथ ने अपनी आँखें बंद कर लीं, तो संसार की दशा सूर्यदेव के नष्ट हो जाने जैसी हो गई। | mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सब लोग निराश हो गए, सब पर भय छा गया। जब भूतनाथ ने अपनी आँखें बंद कर लीं, तो संसार की दशा सूर्यदेव के नष्ट हो जाने जैसी हो गई।
Everyone became disheartened, fear prevailed over everyone. When Bhootnath closed his eyes, the condition of the world became like that of the Sun God being destroyed. 28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥