Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.145.25: उस पर्वत से गिरने वाली समस्त नदियाँ उनके पीछे-पीछे चल रही थीं। मंगलमयी देवी पार्वती पुष्पों की वर्षा करती हुई और नाना प्रकार की सुगन्धियाँ बिखेरती हुई भगवान शिव के पास आ रही थीं। वे भी हिमालय के पार्श्व भाग को ही पी जाती थीं॥25॥ | mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस पर्वत से गिरने वाली समस्त नदियाँ उनके पीछे-पीछे चल रही थीं। मंगलमयी देवी पार्वती पुष्पों की वर्षा करती हुई और नाना प्रकार की सुगन्धियाँ बिखेरती हुई भगवान शिव के पास आ रही थीं। वे भी हिमालय के पार्श्व भाग को ही पी जाती थीं॥25॥
All the rivers falling from that mountain were following them. Auspicious Goddess Parvati came to Lord Shiva showering flowers and spreading various fragrances. They also used to consume only the side portion of the Himalayas. 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥