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mahabharat 13.145.22-23h: मधुसूदन! वृषभध्वज का वह भयानक सभास्थान क्षण भर में अद्भुत शोभा प्राप्त करने लगा। 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  13.145.22-23h 
क्षणेनैवाभवत् सर्वमद्भुतं मधुसूदन॥ २२॥
तत् सदो वृषभाङ्कस्य भीमरूपधरं बभौ।
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! वृषभध्वज का वह भयानक सभास्थान क्षण भर में अद्भुत शोभा प्राप्त करने लगा। 22 1/2॥
 
Madhusudan! That dreadful meeting place of Vrishabhadhwaja started gaining amazing beauty in a moment. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)