Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.145.11: भगवान शंकर की तपस्या के कारण वह पर्वत अत्यंत शोभायमान हो रहा था। स्वाध्यायशील ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित वेदों की ध्वनि वहाँ सर्वत्र गूंज रही थी। 11. | mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स गिरिस्तपसा तस्य गिरिशस्य व्यरोचत।
स्वाध्यायपरमैर्विप्रैर्ब्रह्मघोषो निनादित:॥ ११॥
अनुवाद
भगवान शंकर की तपस्या के कारण वह पर्वत अत्यंत शोभायमान हो रहा था। स्वाध्यायशील ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित वेदों की ध्वनि वहाँ सर्वत्र गूंज रही थी। 11.
That mountain was becoming very beautiful due to the penance of Lord Shankar. The sound of Vedas recited by Brahmins devoted to self-study was resonating everywhere there. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥