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एवमुक्त: स मुनिभिर्नारदो भगवान् मुनि:।
कथयामास देवर्षि: पूर्ववृत्तामिमां कथाम्॥ ५०॥
अनुवाद
ऋषियों के ऐसा कहने पर देवर्षि नारदजी ने यह पूर्व-घटित कथा सुनाई।
When the sages said this, the divine sage Lord Narad narrated this previously occurred story. 50.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि एकोनचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें एक सौ उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ५१ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥