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mahabharat 13.144.45: यह सुनकर भगवान कृष्ण के पास बैठे सभी ऋषिगण बहुत आश्चर्यचकित हुए और कमल की पंखुड़ियों के समान खिले हुए नेत्रों से उनकी ओर देखने लगे।   |   mahabharat अध्याय 13.144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.144.45 
ततो मुनिगणा: सर्वे विस्मिता: कृष्णसंनिधौ।
नेत्रै: पद्मदलप्रख्यैरपश्यंस्तं जनार्दनम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भगवान कृष्ण के पास बैठे सभी ऋषिगण बहुत आश्चर्यचकित हुए और कमल की पंखुड़ियों के समान खिले हुए नेत्रों से उनकी ओर देखने लगे।
 
Hearing this, all the sages sitting near Lord Krishna were very surprised. They started looking at him with their eyes blooming like lotus petals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)