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व्रतचर्यापरीतस्य तपस्विव्रतसेवया।
मम वह्नि: समुद्भूतो न वै व्यथितुमर्हथ॥ ३२॥
अनुवाद
मैं व्रतों के पालन में लगा हुआ था। तपस्वियों द्वारा उस व्रत का पालन करने के कारण मेरा तेज अग्नि के रूप में प्रकट हुआ। अतः आप सभी को इससे दुःख नहीं होना चाहिए ॥32॥
I was engaged in the observance of fasts. Due to the ascetics observing that fast, my radiance appeared in the form of fire. Therefore, you all should not be distressed by it. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥