Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.144.30: श्रीकृष्ण बोले - हे ऋषियों! यह मेरा वैष्णव तेज मेरे मुख से प्रकट हुआ था, जिसने प्रलयकाल में अग्नि का रूप धारण करके इस पर्वत को जला डाला था।   |   mahabharat अध्याय 13.144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.144.30 
वासुदेव उवाच
एतद् वै वैष्णवं तेजो मम वक्त्राद् विनि:सृतम्।
कृष्णवर्त्मा युगान्ताभो येनायं मथितो गिरि:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - हे ऋषियों! यह मेरा वैष्णव तेज मेरे मुख से प्रकट हुआ था, जिसने प्रलयकाल में अग्नि का रूप धारण करके इस पर्वत को जला डाला था।
 
Sri Krishna said - O sages! This Vaishnava radiance of mine had appeared from my mouth; which had taken the form of the fire at the time of doomsday and burnt this mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)