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श्लोक  13.144.14 
हरितेषु सुवर्णेषु बर्हिष्केषु नवेषु च।
उपोपविविशु: प्रीता विष्टरेषु महर्षय:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भगवान द्वारा दिए गए हरे और सुनहरे कुशा से बने नए आसन पर महर्षि प्रसन्नतापूर्वक बैठ गए।
 
The great sage sat happily on the new seats made of green and golden kusha grass given by the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)