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mahabharat 13.144.11-12: इनके अतिरिक्त श्री कृष्णद्वैपायन व्यास, मन्त्रियों में श्रेष्ठ धौम्य, देवल, कश्यप, हस्तिकश्यप तथा अन्य ऋषि-मुनि जो दीक्षा तथा इन्द्रिय-निग्रह से संपन्न थे, अपने देवोपम, तपस्वी तथा सिद्ध शिष्यों के साथ वहाँ आये ॥11-12॥   |   mahabharat अध्याय 13.144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  13.144.11-12 
कृष्णद्वैपायनश्चैव धौम्यश्च जपतां वर:।
देवल: काश्यपश्चैव हस्तिकाश्यप एव च॥ ११॥
अपरे चर्षय: सन्तो दीक्षादमसमन्विता:।
शिष्यैरनुगता: सिद्धैर्देवकल्पैस्तपोधनै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इनके अतिरिक्त श्री कृष्णद्वैपायन व्यास, मन्त्रियों में श्रेष्ठ धौम्य, देवल, कश्यप, हस्तिकश्यप तथा अन्य ऋषि-मुनि जो दीक्षा तथा इन्द्रिय-निग्रह से संपन्न थे, अपने देवोपम, तपस्वी तथा सिद्ध शिष्यों के साथ वहाँ आये ॥11-12॥
 
Apart from these, Shri Krishnadvaipayan Vyas, the best among chanters Dhaumya, Deval, Kashyap, Hastikashyap and other sages and sages who were blessed with initiation and control of senses came there with their Devopam, ascetic and accomplished disciples. 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)