श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 143: पाँच प्रकारके दानोंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.143.3 
कथं केभ्यश्च धर्म्यं च दानं दातव्यमिष्यते।
कै: कारणै: कतिविधं श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
धर्मानुसार दान किस प्रकार और किसे देना चाहिए ? दान किन कारणों से दिया जाना चाहिए ? तथा दान कितने प्रकार का होता है ? मैं यह सब यथार्थ रूप में सुनना चाहता हूँ ॥3॥
 
How and to whom should charity be given according to Dharma? For what reasons should charity be given? And how many types of charity are there? I wish to hear all this in its true form.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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