श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.142.9 
सावित्र: कुण्डलं दिव्यं यानं च जनमेजय:।
ब्राह्मणाय च गा दत्त्वा गतो लोकाननुत्तमान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
सूर्यपुत्र कर्ण महाराज जनमेजय ब्राह्मण को अपना दिव्य कुण्डल तथा वाहन और गौ दान करके उत्तम लोक को चले गए हैं॥9॥
 
Surya's son Karna has gone to the best world by giving his divine earring and donating the vehicle and cow to Maharaja Janmejaya Brahmin. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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