श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.142.5 
प्रतर्दन: काशिपति: प्रदाय तनयं स्वकम्।
ब्राह्मणायातुलां कीर्तिमिह चामुत्र चाश्नुते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
काशी के राजा प्रतर्दन ने अपने प्रिय पुत्र को ब्राह्मण की सेवा में समर्पित कर दिया, जिसके फलस्वरूप उसे इस लोक में अद्वितीय यश प्राप्त हुआ और परलोक में भी वह शाश्वत सुख भोग रहा है ॥5॥
 
King Pratardana of Kasi dedicated his beloved son to the service of a Brahmin, as a result of which he received unparalleled fame in this world and is enjoying eternal bliss in the next world too. ॥5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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