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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन
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श्लोक 4
श्लोक
13.142.4
शिबिरौशीनर: प्राणान् प्रियस्य तनयस्य च।
ब्राह्मणार्थमुपाकृत्य नाकपृष्ठमितो गत:॥ ४॥
अनुवाद
उशीनरकुमार शिवि ने ब्राह्मण के लिए अपने प्रिय पुत्र का प्राण त्यागकर यहाँ से स्वर्ग को प्रस्थान किया।
Ushinarkumar Shivi, after sacrificing the life of his beloved son for the Brahmin, departed from here to heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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