श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.142.31 
दत्त्वा तु सततं तेऽस्तु कौरवाणां धुरन्धर।
दानयज्ञक्रियायुक्ता बुद्धिर्धर्मोपचायिनी॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे कौरवधुरंधर! तुम भी सदैव दान देते रहो। तुम्हारी बुद्धि दान और यज्ञ में लगी रहे तथा धर्म की उन्नति करते रहो।॥31॥
 
O Kauravadhurandhar! You too should always keep giving charity. May your intellect be engaged in charity and the act of sacrifice and keep advancing religion. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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