श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.142.28 
एते चान्ये च बहवो दानेन तपसा च ह।
युधिष्ठिर गता: स्वर्गं विवर्तन्ते पुन: पुन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! ये तथा अन्य बहुत से राजा दान और तप के बल से बार-बार स्वर्ग जाते हैं और वहाँ से इस लोक में लौट आते हैं॥ 28॥
 
Yudhishthira! These and many other kings, by the power of charity and austerity, go to heaven again and again and return from there to this world.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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