श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.142.21 
सर्वकामैश्च सम्पूर्णं दत्त्वा वेश्म हिरण्मयम्।
मौद्‍गल्याय गत: स्वर्गं शतद्युम्नो महीपति:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाराज शतद्युम्न ने मौद्गल्य नामक ब्राह्मण को समस्त कामनाओं से युक्त सुवर्णमय भवन दान करके स्वर्ग प्राप्त किया ॥21॥
 
Maharaja Shatadyumna attained heaven by donating a golden house filled with all the desires to a Brahmin named Maudgalya. ॥21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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