श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.142.2 
भीष्म उवाच
शृणु यैर्धर्मनिरतैस्तपसा भावितात्मभि:।
लोका ह्यसंशयं प्राप्ता दानपुण्यरतैर्नृपै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! सुनो, मैं तुमसे उन पुण्यवान राजाओं के नाम कहता हूँ, जिन्होंने तप के द्वारा शुद्ध अन्तःकरण धारण किया था और जो दान-पुण्य में तत्पर रहकर निःसंदेह बहुत से उत्तम लोकों को प्राप्त हुए हैं॥2॥
 
Bhishmaji said – Yudhishthir! Listen, I am telling you the names of those virtuous kings who had a pure conscience through penance and who, by being active in charity and charity, have undoubtedly attained many good worlds. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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