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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन
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श्लोक 18
श्लोक
13.142.18
राजा मित्रसहश्चैव वसिष्ठाय महात्मने।
मदयन्तीं प्रियां भार्यां दत्त्वा च त्रिदिवं गत:॥ १८॥
अनुवाद
राजा अपनी प्रिय पत्नी मदयन्ती को वसिष्ठ ऋषि की सेवा में देकर अपने मित्रों सहित स्वर्गलोक को चले गए ॥18॥
The king, along with his friends, left for heaven after giving his beloved wife Madayanti to the sage Vasishtha for service. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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