श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.142.14 
रामो दाशरथिश्चैव हुत्वा यज्ञेषु वै वसु।
स गतो ह्यक्षयाँल्लोकान् यस्य लोके महद् यश:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
दशरथनन्दन भगवान श्री रामचन्द्रजी यज्ञों में प्रचुर धन का बलिदान करके संसार में अपनी महान कीर्ति स्थापित करके सनातन लोकों को चले गए॥14॥
 
Dashrathanandan Lord Shri Ramchandraji, after establishing his great fame in the world by sacrificing abundant wealth in the yagyas, went to the eternal worlds. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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