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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 141: दान लेने और अनुचित भोजन करनेका प्रायश्चित्त
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श्लोक 5
श्लोक
13.141.5
मांसप्रतिग्रहे चैव मधुनो लवणस्य च।
आदित्योदयनं स्थित्वा पूतो भवति ब्राह्मण:॥ ५॥
अनुवाद
लुगदी, शहद और नमक का नैवेद्य ग्रहण करने से तथा उस समय से सूर्योदय तक वहीं खड़े रहने से ब्राह्मण शुद्ध हो जाता है ॥5॥
A Brahmin becomes pure by accepting the offering of pulp, honey and salt and by standing there from that time till sunrise. ॥5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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