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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 141: दान लेने और अनुचित भोजन करनेका प्रायश्चित्त  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.141.22 
क्षत्रियै: सह योऽश्नीयाद् ब्राह्मणोऽप्येकभोजने।
आप्लुत: सह वासोभिस्तेन मुच्येत पाप्मना॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण क्षत्रियों के साथ एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करता है, वह वस्त्र सहित स्नान करने से पापों से मुक्त हो जाता है।
 
A Brahmin who eats in the same row with Kshatriyas becomes free from sins by bathing with his clothes on. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)