श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.140.2 
भीष्म उवाच
ब्राह्मणा ब्राह्मणस्येह भोज्या ये चैव क्षत्रिया:।
वैश्याश्चापि तथा भोज्या: शूद्राश्च परिवर्जिता:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - बेटा ! इस संसार में ब्राह्मण को ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के घर भोजन करना चाहिए। शूद्र के घर भोजन करना उसके लिए निषिद्ध है ॥2॥
 
Bhishmaji said – Son! In this world, a Brahmin should eat at the houses of Brahmins, Kshatriyas and Vaishyas. It is prohibited for him to eat food at the house of a Shudra. 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas