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mahabharat 13.140.10: जो वैश्य अपने कर्तव्य छोड़कर शूद्र के कर्तव्य करता है, उसके साथ शूद्र के समान व्यवहार करना चाहिए और उसके यहाँ कभी भोजन नहीं करना चाहिए ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.140.10 
शूद्रकर्म तु य: कुर्यादवहाय स्वकर्म च।
स विज्ञेयो यथा शूद्रो न च भोज्य: कदाचन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो वैश्य अपने कर्तव्य छोड़कर शूद्र के कर्तव्य करता है, उसके साथ शूद्र के समान व्यवहार करना चाहिए और उसके यहाँ कभी भोजन नहीं करना चाहिए ॥10॥
 
A Vaishya who abandons his own duties and performs the duties of a Shudra should be treated like a Shudra and one should never take food at his place. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)