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शूद्रकर्म तु य: कुर्यादवहाय स्वकर्म च।
स विज्ञेयो यथा शूद्रो न च भोज्य: कदाचन॥ १०॥
अनुवाद
जो वैश्य अपने कर्तव्य छोड़कर शूद्र के कर्तव्य करता है, उसके साथ शूद्र के समान व्यवहार करना चाहिए और उसके यहाँ कभी भोजन नहीं करना चाहिए ॥10॥
A Vaishya who abandons his own duties and performs the duties of a Shudra should be treated like a Shudra and one should never take food at his place. ॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥