श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.140.1 
युधिष्ठिर उवाच
के भोज्या ब्राह्मणस्येह के भोज्या: क्षत्रियस्य ह।
तथा वैश्यस्य के भोज्या: के शूद्रस्य च भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे भरत नन्दन! इस संसार में ब्राह्मण किसके घर भोजन करे, क्षत्रिय किसके घर भोजन करे तथा वैश्य और शूद्र किसके घर भोजन करें?॥1॥
 
Yudhishthira asked, "O Bharata Nandan! In this world, at whose place should a Brahmin eat, at whose house should a Kshatriya eat and at whose house should a Vaishya and Shudra eat?॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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