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mahabharat 13.14.d99: भगवान विष्णु जो हृषिकेश (सभी इन्द्रियों के नियंत्रक) हैं, कृष्ण (सच्चिदानंद स्वरूप), द्रुहिण (ब्रह्मा), उरुक्रम (बहुत लंबे कदम उठाने वाले त्रिविक्रम), ब्रह्मा और इंद्र, गरुड़ स्वरूप और एक सींग वाले वराह को नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d99 
हृषीकेशाय कृष्णाय द्रुहिणोरुक्रमाय च।
ब्रह्मेन्द्रकाय तार्क्ष्याय वराहायैकशृङ्गिणे॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु जो हृषिकेश (सभी इन्द्रियों के नियंत्रक) हैं, कृष्ण (सच्चिदानंद स्वरूप), द्रुहिण (ब्रह्मा), उरुक्रम (बहुत लंबे कदम उठाने वाले त्रिविक्रम), ब्रह्मा और इंद्र, गरुड़ स्वरूप और एक सींग वाले वराह को नमस्कार है।
 
Salutations to Lord Vishnu who is Hrishikesh (controller of all the senses), Krishna (Sachchidananda Swarup), Druhin (Brahma), Urukrama (Trivikrama who take very long steps), Brahma and Indra, Garuda Swarup and Varaha with one horn.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)