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mahabharat 13.14.d90: मैं वहाँ हजारों घरों में बड़ी तेजी से घूमा; परंतु कहीं भी अपने आराध्य देव के दर्शन न कर सका; इससे मुझे बड़ी पीड़ा हुई।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d90
 
 
श्लोक  13.14.d90 
तान्यनेकसहस्राणि परीयंस्तु महाजवात्।
अपश्यमानस्तं देवं ततोऽहं व्यथितोऽभवम्॥
 
 
अनुवाद
मैं वहाँ हजारों घरों में बड़ी तेजी से घूमा; परंतु कहीं भी अपने आराध्य देव के दर्शन न कर सका; इससे मुझे बड़ी पीड़ा हुई।
 
I visited thousands of houses there at great speed; but could not see my beloved deity anywhere; this caused me great pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)