श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  13.14.d9 
देवानामपि देवस्त्वं सर्वविद्यापरायण:।
जगद्‍बीजसमाहार जगत: परमो ह्यसि॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आप देवों के देव और समस्त ज्ञान के परम धाम हैं। आप ही जगत के समस्त बीजों को एकत्रित करने वाले हैं। आप ही जगत के परम कारण हैं।
 
Prabhu! You are the god of gods and the ultimate abode of all knowledge. You are the one who collects all the seeds of the world. You are the ultimate cause of the world.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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