Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d83-d84: गरुड़ कहते हैं - ऋषियों! फिर मैं उन महात्मा श्रीहरि के साथ उस सरोवर में प्रविष्ट हुआ। वहाँ मैंने एक बड़ा ही अद्भुत दृश्य देखा। जगह-जगह विधिपूर्वक स्थापित अग्नियाँ बिना किसी ईंधन के जल रही थीं और घी की आहुति पाकर प्रज्वलित हो रही थीं। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गरुड़ कहते हैं - ऋषियों! फिर मैं उन महात्मा श्रीहरि के साथ उस सरोवर में प्रविष्ट हुआ। वहाँ मैंने एक बड़ा ही अद्भुत दृश्य देखा। जगह-जगह विधिपूर्वक स्थापित अग्नियाँ बिना किसी ईंधन के जल रही थीं और घी की आहुति पाकर प्रज्वलित हो रही थीं।
Garuda says - Rishis! Then I entered that lake along with that great soul Shri Hari. There I saw a very wonderful sight. The fires that were properly installed at different places were burning without any fuel and were lit up after receiving the offering of ghee.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥