श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d82
 
 
श्लोक  13.14.d82 
श्रीभगवानुवाच
विशस्व सलिलं सौम्य सुखमत्र वसामहे।
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले- सौम्य! तुम भी जल में प्रवेश करो। हम दोनों यहाँ सुखपूर्वक रहेंगे।
 
Sri Bhagavan said-Soumya! You also enter the water. We both will live here happily.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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