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श्लोक 13.14.d80  |
शब्दानुसारी तु ततस्तं देशमहमाव्रजम्।
तत्रापश्यं ततश्चाहं श्रीमद्धंसयुतं सर:॥ |
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| अनुवाद |
| मैं उन्हीं शब्दों का अनुसरण करते हुए उस स्थान पर पहुँच गया। वहाँ मैंने एक सुन्दर झील देखी जिसमें बहुत सारे हंस सुन्दर दिख रहे थे। |
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| I followed the same words and reached that place. There I saw a beautiful lake in which many swans were looking beautiful. |
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