श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d80
 
 
श्लोक  13.14.d80 
शब्दानुसारी तु ततस्तं देशमहमाव्रजम्।
तत्रापश्यं ततश्चाहं श्रीमद्धंसयुतं सर:॥
 
 
अनुवाद
मैं उन्हीं शब्दों का अनुसरण करते हुए उस स्थान पर पहुँच गया। वहाँ मैंने एक सुन्दर झील देखी जिसमें बहुत सारे हंस सुन्दर दिख रहे थे।
 
I followed the same words and reached that place. There I saw a beautiful lake in which many swans were looking beautiful.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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