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mahabharat 13.14.d78: तत्पश्चात् भगवान् ने मन के समान गति धारण करके मुझे मोहित कर लिया और क्षण भर में वहाँ अन्तर्धान हो गए।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d78
 
 
श्लोक  13.14.d78 
अथ देव: समासाद्य मनस: सदृशं जवम्।
मोहयित्वा च मां तत्र क्षणेनान्तरधीयत॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान् ने मन के समान गति धारण करके मुझे मोहित कर लिया और क्षण भर में वहाँ अन्तर्धान हो गए।
 
Thereafter, God, adopting the same speed as the mind, captivated me and disappeared there in a moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)