श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d75
 
 
श्लोक  13.14.d75 
सुपर्ण उवाच
एवं दत्ताभयस्तेन ततोऽहमृषिसत्तमा:।
नष्टखेदश्रमभय: क्षणेन ह्यभवं तदा॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ बोले - हे महर्षियों! भगवान के इस प्रकार आश्वासन देने पर मेरा शोक, थकान और भय सब क्षण भर में दूर हो गया।
 
Garuda said - O great sages! After the Lord assured me in this manner, my sorrow, fatigue and fear all vanished in a moment.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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