श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d70
 
 
श्लोक  13.14.d70 
भगवन् भूतभव्येश भवद्भूतकृदव्यय।
शरणं सम्प्रपन्नं मां त्रातुमर्हस्यरिंदम॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! भूत और भविष्य के स्वामी, वर्तमान के रचयिता, शत्रुओं का नाश करने वाले, अविनाशी! मैं आपकी शरण में आया हूँ। कृपया मेरी रक्षा करें।
 
‘Lord! Lord of the past and future, creator of the present, destroyer of enemies, indestructible! I have come to your refuge. Please protect me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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