श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  13.14.d7 
भक्तवत्सल पद्माक्ष परमेश्वर पापहन्।
परमात्माविकाराद्य नारायण नमोऽस्तु ते॥
 
 
अनुवाद
भक्त! कमलनयन! भगवान! पापनाशी! निर्भय! एकाकी! नारायण! आपको नमस्कार है।
 
Devotee! Kamalnayan! God! Sinful God! Fearless! Lone man! Narayan! Greetings to you.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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