श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d62
 
 
श्लोक  13.14.d62 
तेन त्वं कृतसंवाद: स्वत: सर्वहितैषिणा।
विश्वरूपेण देवेन पुरुषेण महात्मना॥
तमेवाराधय क्षिप्रं तमाराध्य न सीदसि।
 
 
अनुवाद
हे गरुड़! तुमने उस सर्वव्यापी परमेश्वर से बात की है जो इस जगत् के रूप में है और सबका कल्याण चाहता है; अतः तुम तुरन्त उसकी पूजा करो। उसकी पूजा करने से तुम्हें कभी कोई कष्ट नहीं होगा।
 
Son Garuda! You have spoken to the omnipresent Supreme Being who is in the form of the universe and who wishes well for everyone; therefore, worship Him immediately. By worshipping Him, you will never face any trouble.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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