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mahabharat 13.14.d60: वे लाल, नीले और यहाँ तक कि काले भी दिखाई दे रहे थे। उनके हज़ारों पेट और हाथ थे। उनके विशाल मुखों की संख्या दो हज़ार लग रही थी। उनकी एक आँख और सौ आँखें थीं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d60
 
 
श्लोक  13.14.d60 
रक्तनीलासितनिभ: सहस्रोदरपाणिमान्।
द्विसाहस्रमहावक्त्र एकाक्ष: शतलोचन:॥
 
 
अनुवाद
वे लाल, नीले और यहाँ तक कि काले भी दिखाई दे रहे थे। उनके हज़ारों पेट और हाथ थे। उनके विशाल मुखों की संख्या दो हज़ार लग रही थी। उनकी एक आँख और सौ आँखें थीं।
 
They appeared red, blue and even black. They had thousands of stomachs and hands. Their great faces appeared to be two thousand in number. They had one eye and a hundred eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)