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mahabharat 13.14.d59: बेटा! तब भगवान हरि मुझे संतुष्ट करने के लिए प्रकट हुए। उनके शरीर के विभिन्न अंगों की चमक श्वेत, पीत, लाल, भूरा, कपीश और बैंगनी थी।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d59 
ततो मे दर्शयामास तोषयन्निव पुत्रक।
श्वेतपीतारुणनिभ: कद्रूकपिलपिङ्गल:॥
 
 
अनुवाद
बेटा! तब भगवान हरि मुझे संतुष्ट करने के लिए प्रकट हुए। उनके शरीर के विभिन्न अंगों की चमक श्वेत, पीत, लाल, भूरा, कपीश और बैंगनी थी।
 
Son! Then Lord Hari appeared before me as if to satisfy me. The lustre of his various body parts was white, yellow, red, brown, kapish and purpure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)