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mahabharat 13.14.d56: यह सुनकर मेरे पूज्य पिताजी ने ध्यान किया। दो घंटे ध्यान करने के बाद वक्ताओं में वे महान ऋषि मुझसे बोले -   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d56
 
 
श्लोक  13.14.d56 
श्रुत्वा तु भगवान‍् मह्यं ध्यानमेवान्वपद्यत।
स मुहूर्तमिव ध्यात्वा मामाह वदतां वर:॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर मेरे पूज्य पिताजी ने ध्यान किया। दो घंटे ध्यान करने के बाद वक्ताओं में वे महान ऋषि मुझसे बोले -
 
On hearing this, my revered father meditated. After meditating for two hours, that great sage amongst speakers spoke to me -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)