श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d53
 
 
श्लोक  13.14.d53 
तथास्त्विति स मामुक्त्वा यथाभिप्रायतो गत:॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान ने मुझसे कहा, 'ऐसा ही हो' और अपनी इच्छानुसार चले गये।
 
Then the Lord said 'So be it' to me and went away as per his wish.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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